केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय केरल फिल्मोत्सव (आईएफएफके) 2025 के आयोजकों को निर्देश दिया कि केंद्र से स्वीकृति मिलने का इंतजार किए बगैर सभी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाए।
आईएफएफके में 19 वीं सदी की सोवियत क्लासिक बैटलशिप पोटेमकिन और फिलिस्तीन की कुछ फिल्मों समेत 19 फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए केंद्र सरकार के स्वीकृति रोक कर रखे जाने के कारण फिल्मों का प्रदर्शन नहीं हो पा रहा था और फ़िल्मकारों से लेकर दर्शकों ने इस “बैन” की आलोचना की थी।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र का फिल्मों के प्रदर्शन की अनुमति न देना संघ परिवार के एजंडे के कारण है और आयोजकों को निर्देश दिया कि सभी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाए।
उन्होंने कहा, “फिल्मोत्सव की सेंसरशिप बहुलतावाद और प्रतिरोध के स्वरों को दबाने के संघ परिवार के एजंडे को थोपने का प्रयास है। यह तानाशाही थोपने का एक और उदाहरण है। केरल समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। फिल्मोत्सव में निर्धारित सभी फिल्मों का प्रदर्शन होगा।
केरल के सांस्कृतिक मंत्री शाजी चेरियन ने कहा कि केंद्र के ऐसे कदमों से फिल्मोत्सवों का आयोजन संकट में पड़ जाएगा इसलिए इसका प्रतिरोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोलकाता फिल्मोत्सव में भी ऐसा ही मुद्दा सामने आया था और पश्चिम बंगाल सरकार ने भी प्रदर्शन का निर्णय किया था।
इस बीच केंद्र ने चार फिल्मों की अनुमति मंगलवार को दे दी।
सोमवार को फिल्मोत्सव में 1925 में आई सर्गेई आइज़ेंस्टाइन की फिल्म बैटलशिप पोटेमकिन का प्रदर्शन, जो श्री थिएटर में शाम साढ़े छह बजे होना था, रद्द किया गया था।
इस फिल्म को दुनिया भर के फिल्म प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम में रखा गया है और फिल्म का कथानक 1905 में रूस जारशाही के खिलाफ नौसैनिक विद्रोह पर केंद्रित है।
बैन की गई अन्य फिल्मों में वन्स अपान अ टाइम इन गज़ा, पैलेस्टाईन 36, अ पोइट : अनकंसील्ड पोइट्री, बीफ, क्लैश, वाजिब, आल दैट इज लेफ्ट ऑफ यू और संतोष आदि शामिल हैं। मजे की बात यह है कि “बैन” की गई कुछ फिल्मों का प्रदर्शन भारत सरकार के कुछ सप्ताह पहले ही हुए भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में हुआ था।